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Wednesday, January 17, 2018

J&K आतंकवाद : मनमोहन के मुकाबले मोदी काल में 33% घटी शहीद सैनिकों की संख्या– संजय शर्मा की RTI से हुआ खुलासा l



लखनऊ/18 January 2018............
समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर की आतंकवादी हिंसा में शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों और सैनिकों की संख्या में पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के मुकाबले कमी लाने में कामयाब होती नज़र आ रही है l चौंकाने वाला यह खुलासा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई कंसलटेंट और इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा दायर की गई एक आरटीआई पर भारत सरकार के गृह मामलों के मंत्रालय द्वारा दिए गए एक जबाब से हुआ है l 




लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम कर रहे देश के नामचीन  कार्यकर्ताओं में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते 20 नवम्बर को भारत सरकार को एक आरटीआई अर्जी देकर इस सम्बन्ध में सूचना माँगी थी l भारत सरकार के गृह मामलों के मंत्रालय की निदेशक ( सुरक्षा ) एवं केन्द्रीय जनसूचना अधिकारी सुलेखा ने बीते 9 जनवरी को पत्र जारी कर संजय को सूचना दे दी है l ( संजय की आरटीआई और सुलेखा का जबाब इस स्वतंत्र पत्रकार के पास उपलब्ध है और मोबाइल नंबर 8081898081 पर ई-मेल पता SMS करके e-mail द्वारा  प्राप्त किया जा सकता है l )




सुलेखा ने संजय को बताया है कि 01 जनवरी 2004 से 31 दिसम्बर 2014 तक की 11 वर्षों की अवधि में जम्मू और कश्मीर राज्य में हुई आतंकवादी हिंसा में कुल 1102 सुरक्षा बल और सेना के कार्मिक शहीद हुए l सुलेखा ने संजय को यह भी बताया है कि 01 जनवरी 2015 से 31 दिसम्बर 2017 तक की 3 वर्षों की अवधि में जम्मू और कश्मीर राज्य में हुई आतंकवादी हिंसा में कुल 201 सुरक्षा बल और सेना के कार्मिक शहीद हुए हैं l 




इंजीनियर संजय का कहना है कि साल 2004 से 2014 तक की अवधि के 10 वर्षों में मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे जिनके समय में शहीद सैनिकों का औसत 100 सैनिक प्रतिवर्ष था l संजय ने यह भी कहा है कि साल 2015 से 2017 तक के 3 वर्षों में देश की कमान वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में है जिनके समय में शहीद सैनिकों का औसत घटकर 67 सैनिक प्रतिवर्ष पर आ गया है l बकौल संजय इस प्रकार केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर की आतंकवादी हिंसा में शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों और सैनिकों की संख्या में पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के मुकाबले मोटा-मोटी 33 प्रतिशत की भारी-भरकम कमी लाने में कामयाब रही है l



सुरक्षा बालों और सैनिकों के जीवन को अनमोल बताते हुए आरटीआई विशेषज्ञ संजय शर्मा ने शहीद सनिकों की संख्या में कमी लाने के लिए नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित करने और अपने अपंजीकृत संगठन ‘तहरीर’ की ओर से पत्र लिखकर जम्मू कश्मीर को पूर्णतया आतंकवाद मुक्त करने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए शुभकामनायें प्रधानमंत्री तक पहुंचाने की बात इस स्वतंत्र पत्रकार से की गई एक  एक्सक्लूसिव वार्ता में कही है l 


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News written by freelance journalist Urvashi Sharma  
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj
( Disclaimer - This news item can be copy pasted free of charge if used without editing. This news item can be used free of charge with edits but only with proper reference of both of yaishwaryaj & this freelance journalist or with prior permission of news author, i.e. a telephonic permission taken on her mobile number 8081898081)


Thursday, January 11, 2018

RTI गर्ल ऐश्वर्या पाराशर की गोमती से गंगा को मिलाने की मांग : परियोजना बनाने को UP CM योगी को लिखा पत्र l



Lucknow/11-01-2018…………समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )...........Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj
हिन्दू आस्था के जीवित कारकों में गंगा का स्थान सर्वोपरि है l आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से होकर जो नदियाँ बहती हैं उनमें गंगा के साथ-साथ गोमती भी एक प्रमुख नदी है l राजधानी लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा की कक्षा 11 की जीव विज्ञान की 15 वर्षीय छात्रा और देश भर में आरटीआई गर्ल के नाम से जानी जाने वाली ऐश्वर्या पाराशर ने हिन्दू आस्था का वास्ता देते हुए आज सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर गोमती नदी के उद्गम के आस-पास गंगा नदी की एक धार को मिलाने के लिए ‘गंगा गोमती लिंक परियोजना शुरू करने की मांग उठा दी है l

बताते चलें कि 8 साल की नन्हीं सी उम्र से आरटीआई के सफल प्रयोग करने के चलते ही ऐश्वर्या देश भर में आरटीआई गर्ल के नाम से जानी जाती हैं l देश को सूखे और बाढ़ से निजात दिलाने के लिए नदी जोड़ो योजना के विचार को सरकारी रूप से पहचान देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और इस योजना के लिए केंद्र की वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार  द्वारा 5 लाख करोड़ रुपयों का प्राविधान करने की बात अपने पत्र में कहते हुए ऐश्वर्या ने योगी से गुहार लगाई है कि वे मध्य प्रदेश सरकार की ‘नर्मदा क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना’ की तर्ज पर ‘गंगा गोमती लिंक परियोजना’ बनाकर गोमती नदी के उद्गम यूपी के माधो टांडा स्थित गोमत ताल के आस-पास गंगा नदी की एक धार को गोमती से  मिलाने के लिए काम शुरू करें l

आरटीआई के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाने वाली 15 वर्षीय इस जागरूक छात्रा ने अपने पत्र में योगी को हिन्दू आस्था का वास्ता देते हुए लिखा है कि यदि योगी गंगा को गोमती से मिला देते हैं तो गोमती किनारे बसे लखीमपुर खीरी,सीतापुर,हरदोई,लखनऊ,सुल्तानपुर,जौनपुर आदि जिलों के करोड़ों लोग गंगा नदी के दर्शन अपने जिले में ही कर अपने धार्मिक क्रियाकलापों के लिए सुदूर जिलों तक आने-जाने की जद्दोजहत से बच सकेंगे l

बायो टेक्नोलॉजी में विशेष रूचि रखने वाली ऐश्वर्या पाराशर ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि उसके योगी अंकल उसके प्रपोजल पर कार्यवाही करके केंद्र सरकार से बात करके प्रदेशवासियों को ‘गंगा गोमती लिंक परियोजना’ का तोहफा अवश्य देंगे l 

News written by freelance journalist Urvashi Sharma  
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

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Friday, January 5, 2018

UP : सूचना आयुक्त से मिल ब्लैकमेलर,दलाल RTI कार्यकर्ताओं के नाम सार्वजनिक कराएंगी एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा l




लखनऊ/05-01-2018...............................उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने बीते कल रामपुर के विकास भवन में जन सूचनाधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में बयान दिया था कि अधिकांश आरटीआई कार्यकर्ता आरटीआई  के नाम पर दलाली और ब्लैकमेलिंग करते हैं। इस बात को सच बताने के लिए उस्मान ने रामपुर के एक मामला का हवाला भी दिया था हालाँकि उस्मान ने कथित ब्लैकमेलर कार्यकर्ता का नाम सार्वजनिक नहीं किया था । कथित ब्लैकमेलर कार्यकर्ता को कचहरी में बैठने वाला बताते हुए उस्मान ने कार्यकर्ता के उनके सामने रो देने के बाद बिना ऍफ़.आई.आर. लिखाये मामला रफा-दफा कर देने की बात कहते हुए ऐसे और भी कई मामले होने की बात सार्वजनिक रूप से कही थी। उस्मान ने यह भी कहा था कि ऐसे लोगों के खिलाफ आयोग काफी सख्ती से कार्रवाई करता है। सूचना आयुक्त ने यह भी कहा था कि वे डरकर काम नहीं करते, मजबूती से काम करते हैं और उन्होंने कई बार आरटीआई कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज कराई है। उस्मान ने उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2015 में अधिनियम का दुरुपयोग करने वालों के लिए कार्रवाई का नया  प्रावधान किये जाने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही थी । 



सूचना आयुक्त के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सूबे की तेजतर्रार आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने उस्मान के इस बयान को सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए राजनैतिक मानसिकता के तहत दिया गया एक ऐसा भ्रामक बयान बताया है जो सूबे में आरटीआई आन्दोलन के लिए आत्मघाती साबित होगा l बकौल उर्वशी सूचना आयोग के वर्तमान आयुक्तों में से अच्छा काम करने वाले आयुक्तों में शुमार होने वाले हाफिज उस्मान के ऐसे आरटीआई विरोधी बयान से    वे व्यक्तिगत रूप से व्यथित हैं l उर्वशी ने बयान जारी करके कहा है कि उस्मान के वक्तव्य से उनके जैसे अनेकों सच्चे आरटीआई कार्यकर्ताओं का मनोबल कम होगा जिसकी अंतिम परिणति सूबे में पारदर्शिता और जबाबदेही की मुहिम के कमजोर होने के रूप में सामने आयेगी l 



बकौल उर्वशी कुछेक गलत लोगों की बजह से आरटीआई एक्टिविस्टों की पूरी की पूरी बिरादरी पर तोहमत लगाया जाना सही नहीं है और इसीलिये अब वे शीघ्र ही सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान और मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी से मिलकर हाफिज उस्मान के भ्रामक वक्तव्य पर  स्पष्टीकरण जारी करने के साथ-सतह आरटीआई  के नाम पर दलाली और ब्लैकमेलिंग करने वाले सभी आरटीआई कार्यकर्ताओं के नाम आयोग की वेबसाइट पर और आयोग में सूचना पट पर प्रदर्शित कराने और सभी कथित ब्लैकमेलर कार्यकर्ताओं के खिलाफ तत्काल ऍफ़.आई.आर. लिखाने की मांग करेंगी l 



उर्वशी ने बताया कि RTI एक्ट का दुरुपयोग करने से लोगों को हतोत्साहित करने के लिए वे उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2015 में अधिनियम का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के उस्मान द्वारा बताये गए नए प्रावधान को भी आयोग में जगह-जगह लिखाए जाने और आयोग द्वरा इसका प्रचार-प्रसार करने की मांग करेंगी l

Thursday, January 4, 2018

Monday, January 1, 2018

RTI एक्टिविस्ट उर्वशी की सूचना आयोगों को Autonomy देकर संवैधानिक दर्जा देने की मांग l





लखनऊ/01 जनवरी 2018..................... लखनऊ स्थित अपंजीकृत सामाजिक संगठन येश्वर्याज की संस्थापिका और प्रबंधकीय सदस्य उर्वशी शर्मा ने आज भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को एक प्रस्ताव भेजकर  भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने की मांग उठा दी है l 


बताते चलें कि ‘येश्वर्याज लखनऊ स्थित एक सामाजिक संगठन है जो विगत 17  वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है l


उर्वशी ने अपने पत्र में लिखा है “साल 2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है । सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लागू करने के पीछे के प्रमुख उद्देश्यों यथा नागरिकों तक सूचना की पंहुंच सुनिश्चित करके सरकारी कामकाजों को भ्रष्टाचार मुक्त करने आदि को प्राप्त करने में सूचना आयोगों की भूमिका सर्वोपरि है l
 

उर्वशी ने दावा किया है कि व्यवहारिक अनुभव के आधार पर संस्था का आंकलन है कि वित्तीय स्वायत्तता न होने के चलते सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली सरकारों की ओर झुकती चली जा रही है जिसके कारण सूचना आयोग सरकारी कामकाजों को पारदर्शी और जबाबदेह बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त रखने के अपने प्रमुख दायित्व का निर्वहन सम्यक रूप से नहीं कर पा रहे हैं l बकौल उर्वशी संस्था मानती है कि यदि सूचना आयोगों को जल्द ही सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण मुक्त नहीं किया गया तो उनका गठन करने का भारत की संसद का उद्देश्य ही अर्थहीन हो जाएगा और इसीलिये संस्था ने देश के सभी सूचना आयोगों को भी चुनाव आयोग और कैग की तर्ज पर वित्तीय स्वायत्तता देकर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने  और इनको सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण  मुक्त करने की आवश्यकता बताते हुए  भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने के सम्बन्ध में संस्था द्वारा प्रेषित किये जा रहे संस्था के प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार करके मांग-पत्र का निस्तारण करें l मुद्दे को व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ बताते हुए शीर्ष पदाधिकारियों से उनके व्यक्तिगत ध्यानाकर्षण और समर्थन की अपेक्षा और प्रार्थना करने की बात भी इस मांगपत्र में कही गई है l प्रस्ताव की प्रति भारत के सभी राज्यों के राज्यपालों को भी भेजे जाने की बात उर्वशी ने कही है l

उर्वशी ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि केंद्र सरकार उनके प्रस्ताव पर कार्यवाही कर सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता देकर उन्हें संवैधानिक निकाय बनायेगी l  


भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने की एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा की मांग l

लखनऊ/01 जनवरी 2018..................... लखनऊ स्थित अपंजीकृत सामाजिक संगठन येश्वर्याज की संस्थापिका और प्रबंधकीय सदस्य उर्वशी शर्मा ने आज भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को एक प्रस्ताव भेजकर  भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने की मांग उठा दी है l 

बताते चलें कि ‘येश्वर्याज लखनऊ स्थित एक सामाजिक संगठन है जो विगत 17  वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है l

उर्वशी ने अपने पत्र में लिखा है “साल 2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है । सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लागू करने के पीछे के प्रमुख उद्देश्यों यथा नागरिकों तक सूचना की पंहुंच सुनिश्चित करके सरकारी कामकाजों को भ्रष्टाचार मुक्त करने आदि को प्राप्त करने में सूचना आयोगों की भूमिका सर्वोपरि है l

उर्वशी ने दावा किया है कि व्यवहारिक अनुभव के आधार पर संस्था का आंकलन है कि वित्तीय स्वायत्तता न होने के चलते सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली सरकारों की ओर झुकती चली जा रही है जिसके कारण सूचना आयोग सरकारी कामकाजों को पारदर्शी और जबाबदेह बनाकर भ्रष्टाचार मुक्त रखने के अपने प्रमुख दायित्व का निर्वहन सम्यक रूप से नहीं कर पा रहे हैं l बकौल उर्वशी संस्था मानती है कि यदि सूचना आयोगों को जल्द ही सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण मुक्त नहीं किया गया तो उनका गठन करने का भारत की संसद का उद्देश्य ही अर्थहीन हो जाएगा और इसीलिये संस्था ने देश के सभी सूचना आयोगों को भी चुनाव आयोग और कैग की तर्ज पर वित्तीय स्वायत्तता देकर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने  और इनको सरकारों के नियंत्रण से पूर्णरूपेण  मुक्त करने की आवश्यकता बताते हुए  भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे भारत के सभी सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान कर संवैधानिक प्राधिकरण बनाने के सम्बन्ध में संस्था द्वारा प्रेषित किये जा रहे संस्था के प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार करके मांग-पत्र का निस्तारण करें l मुद्दे को व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ बताते हुए शीर्ष पदाधिकारियों से उनके व्यक्तिगत ध्यानाकर्षण और समर्थन की अपेक्षा और प्रार्थना करने की बात भी इस मांगपत्र में कही गई है l प्रस्ताव की प्रति भारत के सभी राज्यों के राज्यपालों को भी भेजे जाने की बात उर्वशी ने कही है l 


उर्वशी ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि केंद्र सरकार उनके प्रस्ताव पर कार्यवाही कर सूचना आयोगों को पूर्ण स्वायत्तता देकर उन्हें संवैधानिक निकाय बनायेगी l